Wednesday, June 10, 2009

मैं नहीं हूं!


मै गज़ल हूं,
पढे कोई.

मेरी किस्मत,
गढे कोई.

मै सफ़र हूं,
चले कोई.

मै अकेला,
मिले कोई.

मै अन्धेरा,
जले कोई.

मैं हूं सन्दल,
मले कोई.

मै नहीं हूं,
कहे कोई.

 

6 comments:

AlbelaKhatri.com said...

achha prayog !
achhi rachna !
_______________
_______________BADHAAI !

Pradeep Kumar said...

wah ! kya khoob likhaa hai . chhoti si kavitaa main ek poora falsafa .
naye prayog ke liye bahut bahut badhaai

mark rai said...

मैं हूं सन्दल,
मले कोई.

मै नहीं हूं,
कहे कोई.....
haaan aisa to hai...

ktheLeo said...

Dear Mark,
elaborate your argument and thought ,if you please!

विनय said...

करिश्मा न कहूँ तो क्या कहूँ... बहुत बढ़िया

ktheLeo said...

विनय जी,
हुस्ने नज़र है आप का.
बेबाक तारीफ़ के लिये शुक्रिया.