Monday, November 9, 2009

चश्मे नम मेरे....क्षणिका.


परेशाँ हैं, चश्मे नम मेरे,
कि इन्हें, लमहा, लमहा,
रुला रहा है कोई.....

चाहूँ थमना चलते, चलते,
क़दम बढ्तेही जा रहें हैं,
सदाएँ दे रहा है कोई.....

अए चाँद, सुन मेरे शिकवे,
तेरीही चाँदनी बरसाके,
बरसों, जला रहा कोई......

9 comments:

दिगम्बर नासवा said...

परेशाँ हैं, चश्मे नम मेरे,
कि इन्हें, लमहा, लमहा,
रुला रहा है कोई.....

सुन्दर शब्द हैं ........गहरा एहसास है ..... कोई दर्द बह रहा है इन आँखों से ....

ओम आर्य said...

अए चाँद, सुन मेरे शिकवे,
तेरीही चाँदनी बरसाके,
बरसों, जला रहा कोई......आह .............

ktheLeo said...

Waah! Kamaal likha hai aap ne!Dard kI tasveer hai ye rachna!

shama said...

Ye kya samasya hai..Leoji, mai aapka blog lholna chahtee hun, aur mera khul raha hai..pahle to aisa nahee hua!

रश्मि प्रभा... said...

lamha lamha ansuon ke baad lamha lamha muskaan aati hai......nam aankhon mein chiraag jalte hain aagat khushiyon ke

वन्दना अवस्थी दुबे said...

अए चाँद, सुन मेरे शिकवे,
तेरीही चाँदनी बरसाके,
बरसों, जला रहा कोई.....
क्या कहूं?

Dipak 'Mashal' said...

Aapki qalam choomne ka man karta hai... jisne itni sundar panktiyon ko likh dala..
Jai Hind...

योगेश स्वप्न said...

अए चाँद, सुन मेरे शिकवे,
तेरीही चाँदनी बरसाके,
बरसों, जला रहा कोई....

behatareen.

ρяєєтι said...

lamha lamha ....
Antarman ki sundar abhivyakti...!