Thursday, April 9, 2009

पीला-सा माहताब....

"दिखता है जो मुखड़ा
जैसे हो पीला-सा माहताब,
सुनते हैं, कभी रौशन,
होता था इतना,
लोग कहते थे उसे,
के, हाय माहजबीं !,
दिल करता है, तुम्हें
कहके पुकारें ,' ऐ आफताब !' "

2 comments:

'sammu' said...

jo tha mahejabeen mahetab,
aajbhee uska hai koyee bhee jabab ?
rang aur noor badalte honge ,
aaftaab pukara jayega bas aaftaab !

Shama said...
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