Thursday, September 10, 2009

दिलकी राहें.........

बहोत वक़्त बीत गया,
यहाँ किसीने दस्तक दिए,
दिलकी राहें सूनी पड़ीं हैं,
गलियारे अंधेरेमे हैं,
दरवाज़े हर सरायके
कबसे बंद हैं !!
राहें सूनी पडी हैं॥

पता नही चलता है
कब सूरज निकलता है,
कब रात गुज़रती है,
सुना है, सितारों भरी ,
होतीं हैं रातें भी
राहें सूनी पड़ीं..

चाँद भी घटता बढ़ता है,
शफ़्फ़ाक़ चाँदनी, रातों में,
कई आँगन निखारती है,
यहाँ दीपभी जला हो,
ऐसा महसूस होता नही....
दिलकी राहें सूनी पड़ीं...

उजाले उनकी यादोंके,
हुआ करते थे कभी,
अब तो सायाभी नही,
ज़माने गुज़रे, युग बीते,
इंतज़ार ख़त्म होगा नही...
दिलकी राहें सूनी पड़ीं....


यहाँ होगी रहगुज़र कोई,
राहें, रहेंगी सूनी,सूनी,
कौन समझाए उसे?
कौन कहेगा उसे?
वो किसीका सुनती नही.....
सूनी राहों को तकती रहती...

14 comments:

Dr. Amarjeet Kaunke said...

यहाँ होगी रहगुज़र कोई,
राहें, रहेंगी सूनी,सूनी,
कौन समझाए उसे?
कौन कहेगा उसे?
वो किसीका सुनती नही.....
सूनी राहों को तकती रहती...

inthaa udaasi ke ye rekhachitar bahut udas karne wala hai.....amarjeet kaunke

रश्मि प्रभा... said...

उजाले उनकी यादोंके,
हुआ करते थे कभी,
अब तो सायाभी नही,
ज़माने गुज़रे, युग बीते,
इंतज़ार ख़त्म होगा नही...
दिलकी राहें सूनी पड़ीं...behad achhi rachna

योगेश स्वप्न said...

hriday sparshi rachna. umda.

badhai.

योगेश स्वप्न said...

hriday sparshi rachna. umda.

badhai.

ओम आर्य said...

यहाँ होगी रहगुज़र कोई,
राहें, रहेंगी सूनी,सूनी,
कौन समझाए उसे?
कौन कहेगा उसे?
वो किसीका सुनती नही.....
सूनी राहों को तकती रहती...

बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति जो दिल के करीब लगी

चंदन कुमार झा said...

सुन्दर भाव !!!!!!!!

Vikas Mogha said...

उजाले उनकी यादोंके,
हुआ करते थे कभी,
अब तो सायाभी नही,
ज़माने गुज़रे, युग बीते,
इंतज़ार ख़त्म होगा नही...
दिलकी राहें सूनी पड़ीं....

waah waah waah......

behad sundar abhivyakti

विनय ‘नज़र’ said...

dazzling wordings

मुकेश कुमार तिवारी said...

शमा जी,


चाँद भी घटता बढ़ता है,
शफ़्फ़ाक़ चाँदनी, रातों में,
कई आँगन निखारती है,
यहाँ दीपभी जला हो,
ऐसा महसूस होता नही....
दिलकी राहें सूनी पड़ीं...


खूब लुभाया इन पंक्तियों ने।

सादर,


मुकेश कुमार तिवारी

दिगम्बर नासवा said...

GAHRE EHSAAS MEIN DOOB KAR LIKHI NAJMEN HAI ...

Prem said...

जो ख़ुद शमा हो ,उसकी राहें सूनी कैसे ,खैर प्रस्तुति कमाल है ।

ज्योति सिंह said...

उजाले उनकी यादोंके,
हुआ करते थे कभी,
अब तो सायाभी नही,
ज़माने गुज़रे, युग बीते,
इंतज़ार ख़त्म होगा नही...
दिलकी राहें सूनी पड़ीं....
ati sundar .

अविनाश वाचस्पति said...

सूरज जो दिल में जलता है
उसका पता भी कहां चलता है
यादों में सबकी पलता है
आंखों में सबकी ढलता है।

'sammu' said...

kuchh log hain abhage dastak naheen sunate .
ham hain ki kab se dar pe tere jar jar hain .