Sunday, November 6, 2011

उम्र का सच




उम्र की नाप का पैमाना क्या है?

साल,

माथे  या गालों की झुर्रियां,

सफ़ेद बालों की झलक,

मैं मानता नहीं,

उम्रदराज़ होने के लिये,
न तो सालों लम्बे सफ़र की ज़रूरत है,
और न अपने चेहरे पे वख्त की लकीरें उकेरने की,

उम्र तो वो मौसम है ज़िन्दगी का,
जो दबे पांव चला आता है,
अचानक कभी भी,
और सिखा जाता है,
सारे दांव पेंच ,दुनियादारी के,

आप मानते नहीं ,

चलो जाने दो,
अगली बार जब ट्रैफ़िक लाइट पर रुको,
तो कार के शीशे से बाहर देखना,  

छै से दस साल की  कई कम उम्र लडकियां ,
अपनी गोद में खुद से जरा ही कम बच्चे को लिये,
दिख जायेंगी,

उम्र नापने के सारे पैमाने,
तोड देने का दिल करेगा मेरे दोस्त!

और  तब,

एक बार, 

सिर्फ़ एक बार,

उन सब ’हेयर कलर’ और ’स्किन क्रीम’ के
नाम याद करने  की कोशिश करना,
जो उम्र के निशान मिटा देने का दावा करते है,


उन में से एक भी,
उम्र के,
इन निशानों को नहीं मिटा सकतीं!


Also at "सच में"    www.sachmein.blogspot.com

13 comments:

वन्दना said...

उफ़ ………कितना कटु सत्य कहा है।सुन्दर भावाव्यक्ति।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सूक्ष्म अवलोकन ... अच्छी प्रस्तुति

अनुपमा पाठक said...

क्या सटीक बात कही है!
सच्ची कविता!

वाणी गीत said...

उम्र के निशान आंकड़ों से नहीं गिने जाते ...
एक क्षणिका लिखी थी मैंने भी ...
चेहरे पर लकीरें
उम्र के निशान नहीं
आंसूं हैं जो सूख गये
बिना पोंछे ही!

दिगम्बर नासवा said...

वाह ... बहुत प्रभावी उम्दा ... सच है उम्र अचानक ही आ जाती है सालों से अंतराल से कुछ नहीं होता ...

shama said...

अगली बार जब ट्रैफ़िक लाइट पर रुको,
तो कार के शीशे से बाहर देखना,

छै से दस साल की कई कम उम्र लडकियां ,
अपनी गोद में खुद से जरा ही कम बच्चे को लिये,
दिख जायेंगी,

उम्र नापने के सारे पैमाने,
तोड देने का दिल करेगा मेरे दोस्त!
Kya baat kahee hai! Wah!

रजनीश तिवारी said...

bilkul sach kaha aaapne ..

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

सच से रूबरू कराती रचना.

प्रेम सरोवर said...

आपके पोस्ट पर आना सार्थक सिद्ध हुआ । पोस्ट रोचक लगा । मेरे नए पोस्ट पर आपका आमंत्रण है । धन्यवाद ।

Udan Tashtari said...

प्रभावशाली!!!

Human said...

सही कहा आपने उम्र अनुभव से ही आंकी जाती है ।

***Punam*** said...

उन में से एक भी,
उम्र के,
इन निशानों को नहीं मिटा सकतीं!


sach mein....
umr ko naapne ka paimana alag hi hota hai...

Poonam Agrawal said...

Ye najara dekha to sabne hoga kai kai baar ... lekin use shabdo me pirona ek badi kala hai ... jo aapne bakhubi nibhai hai ... dil ko bhigo dene vali panktiyo k liye aapka khoob khoob aabhar ....