Saturday, August 7, 2010

"कविता" पर भी, दस्तूर!

दस्तूर ये कि लोग सिर्फ़ नाम के दीवाने है,
और बुज़ुर्गों ने कहा के नाम में क्या रखा है!

लिफ़ाफ़ा देखकर औकात समझो हुज़ुर,
बात सब एक है पैगाम में क्या रखा है!

सोच मैली,नज़र मैली,फ़ितरतो रूह तक मैली,
अख्लाक़ साफ़ करो जनाब हमाम में क्या रखा है! 

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8 comments:

वन्दना said...

लिफ़ाफ़ा देखकर औकात समझो हुज़ुर,
बात सब एक है पैगाम में क्या रखा है!

वाह्………………बेहद उम्दा।

संगीता पुरी said...

बहुत खूब !!

अजय कुमार said...

बहुत खूब ,अच्छी रचना ।

shama said...

सोच मैली,नज़र मैली,फ़ितरतो रूह तक मैली,
अख्लाक़ साफ़ करो जनाब हमाम में क्या रखा है!
Oh! Wah! Kya gazab alfaaz hain is pooree rachna ke! Kmal kar diya is baarbhee!

रवि कुमार, रावतभाटा said...

एक हट कर अंदाज़...

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

शानदार...
तीनों शेर पसंद आए.

ana said...

mere blog me aane ke liye shukriya

लिफ़ाफ़ा देखकर औकात समझो हुज़ुर,
बात सब एक है पैगाम में क्या रखा है!
lajvaab panktiyaa

mridula pradhan said...

very good.