Monday, January 25, 2010

खता किसने की?

खता किसने की?
इलज़ाम किसपे लगे?
सज़ा किसको मिली?
गडे मुर्दोंको गडाही छोडो,
लोगों, थोडा तो आगे बढो !
छोडो, शिकवोंको पीछे छोडो,
लोगों , आगे बढो, आगे बढो !

क्या मर गए सब इन्सां ?
बच गए सिर्फ़ हिंदू या मुसलमाँ ?
किसने हमें तकसीम किया?
किसने हमें गुमराह किया?
आओ, इसी वक़्त मिटाओ,
दूरियाँ और ना बढाओ !
चलो हाथ मिलाओ,
आगे बढो, लोगों , आगे बढो !

सब मिलके नयी दुनिया
फिर एकबार बसाओ !
प्यारा-सा हिन्दोस्ताँ
यारों दोबारा बनाओ !
सर मेरा हाज़िर हो ,
झेलने उट्ठे खंजरको,
वतन पे आँच क्यों हो?
बढो, लोगों आगे बढो!

हमारी अर्थीभी जब उठे,
कहनेवाले ये न कहें,
ये हिंदू बिदा ले रहा,
इधर देखो, इधर देखो
ना कहें मुसलमाँ
जा रहा, कोई इधर देखो,
ज़रा इधर देखो,
लोगों, आगे बढो, आगे बढो !

हरसूँ एकही आवाज़ हो
एकही आवाज़मे कहो,
एक इन्सां जा रहा, देखो,
गीता पढो, या न पढो,
कोई फ़र्क नही, फ़ातेहा भी ,
पढो, या ना पढो,
लोगों, आगे बढो,

वंदे मातरम की आवाज़को
इसतरहा बुलंद करो
के मुर्दाभी सुन सके,
मय्यत मे सुकूँ पा सके!
बेहराभी सुन सके,
तुम इस तरहाँ गाओ
आगे बढो, लोगों आगे बढो!

कोई रहे ना रहे,
पर ये गीत अमर रहे,
भारत सलामत रहे
भारती सलामत रहें,
मेरी साँसें लेलो,
पर दुआ करो,
मेरी दुआ क़ुबूल हो,
इसलिए दुआ करो !
तुम ऐसा कुछ करो,
लोगों आगे बढो, आगे बढो!!

10 comments:

ह्रदय पुष्प said...

क्या मर गए सब इन्सां ?
बच गए सिर्फ़ हिंदू या मुसलमाँ ?
किसने हमें तकसीम किया?
किसने हमें गुमराह किया?

कोई रहे ना रहे,
पर ये गीत अमर रहे,
भारत सलामत रहे
भारती सलामत रहें,

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर ये सौगात - बहुत-बहुत खूब - तहे दिल से शुक्रिया
गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई.

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

शमा साहिबा, आदाब
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
........भारत सलामत रहे
भारती सलामत रहें......
मेरी दुआ क़ुबूल हो.....
(आमीन)
शुक्रिया इन दुआओं के लिये
जज्बात पर भी तशरीफ़ लाईयेगा
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

मनोज कुमार said...

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

योगेश स्वप्न said...

aameen/ tathastu.

वाणी गीत said...

वन्दे मातरम् ...
दुआ कुबूल हो ...आमीन ...

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें ....!!

BrijmohanShrivastava said...

शिकवों को पीछे छोड आगे बढो/दूरियां न बढाओ हाथ मिलाओ/नई दुनियां फिर बसाओ/ बहुत उत्तम अर्थी की क्या जात/यह भी बहुत उत्तम कि मुर्दा भी सुनकर मैयत मे सकून पा सके/और अन्तिम पद पर -आमीन

इस्मत ज़ैदी said...

shama ji bahut pakeeza khayalat bhain aapke ,sach hai ham insaniyat ko bhool kar hindu musalman ban kar rah gaye ,lekin ab aur nahin awam in chalon ko samajh chuki hai ,khuda kare hamara mulk ,hamari ekta ,hamara tiranga aur hamara bhaichara hamesha qayem rahe

वन्दना अवस्थी दुबे said...

क्या बात है. काश कि सब ऐसा ही सोचने लगें.
गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें.

संजय भास्कर said...

बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन

Sanjay kumar
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

pinki vajpayee said...

thanks sama ji....
aapne meri kavita ki sarahna ki...main dil se aapki aabhari hun..
apke sabhi blogs tarif ke kabil hai..

http://pinkivajpayee.blogspot.com/