Thursday, April 8, 2010

रुसवाईयाँ..!

अब रुसवाईयों से क्या डरें ?
जब तन्हाईयाँ सरे आम हो गयीं ?
खता तो नही की थी एकभी ,
पर सजाएँ सरे आम मिल गयीं !
काम बनही गया,जो रुसवा कर गए,
ता-उम्र तन्हाई की सज़ा दे गए..!

10 comments:

मनोज कुमार said...

बेहतरीन। बधाई।

निर्झर'नीर said...

अब रुसवाईयों से क्या डरें ?
जब तन्हाईयाँ सरे आम हो गयीं ?

sundar gahre bhaav ,bahut din baad aapko padhne ka mauka mila .bahut accha laga .

श्याम कोरी 'उदय' said...

...बहुत सुन्दर!!!

संजय भास्कर said...

बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन


SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Suman said...

nice

sangeeta swarup said...

खूबसूरत शब्दों में अपने भाव भरे हैं...बधाई

Reetika said...

atyant UMDA!!

Reetika said...

atyant UMDA!!

वाणी गीत said...

काम बन ही गया जो रुसवा कर गए ...
बदनाम हुए तो क्या नाम ना हुआ ...
यह फलसफा भी जीवन का कम नहीं ...!!

ktheLeo said...

vaah!