Wednesday, April 13, 2011

किसी ने पूछा...

किसी ने पूछा मुझ से ,
रोती हो क्यों अकेले,अकेले?
हँसी आ गयी सुनके!
कहा,यही तो कर सकती हूँ अकेले!
हँसने के लिए चाहियें,
क्या जानूँ कितने क़ाफ़िले!
हँसने गर लगी अकेले,
कहोगे,पगली है ये!
पागल ख़ाने भेजो इसे!

17 comments:

M VERMA said...

बहुत सुन्दर
पागलपन से तो बचना ही होगा

knkayastha said...

बहुत सटीक...

वन्दना said...

सच कहा।

psingh said...

sundar aur jorda rachna
bahut khub abhar

ABHIVYAKTI said...

kya satik baat hai
roya hi toh jata hai akele

tum joh hansoge toh hansegi ya duniya
rowoge tum toh na royegi duniya

tere aansuon ko samajh na sakegi
teri aansuon pe hansegi yeh duniya

आशु said...

chand shabdon me bahut kuchh keh diya aap ne..

आशु said...

aap ne chan shabdon me bahut kuchh keh diya hai!!!

Pradeep Kumar said...

wah kya baat hai aur bilkul satya bhi ! dukh me to har insaan akela hi hota hai

Dr.R.Ramkumar said...

bilkul sahih kaha hai aapne --hansenge bheed mein royenge akela...

mridula pradhan said...

ekdam theek.

Minakshi Pant said...

sundar

BrijmohanShrivastava said...

तुम हो नाखुश तो यहां कौन है खुश फिर भी फराज -
लोग रहते है इसी शहरे.दिल.आजार के बीच

वीना said...

बहुत ही सुंदर....

Richa P Madhwani said...

humara blog apki comment k liye intezar kar raha hai kya aap kuch shabd likhengi
http;//shayaridays.blogspot.com

श्यामल सुमन said...

बहुत सुन्दर भाव सम्प्रेषण रश्मि प्रभा जी. कम शब्दों में कमाल कर दिया आपने.

सादर
श्यामल सुमन
+919955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

प्रदीप कांत said...

हँसने के लिए चाहियें,
क्या जानूँ कितने क़ाफ़िले!
हँसने गर लगी अकेले,
कहोगे,पगली है ये!
पागल ख़ाने भेजो इसे!

सटीक

๑♥!!अक्षय-मन!!♥๑, said...

वाह ! ये शब्द तो मेरे अस्तित्व से भी मिलते जुलते हैं.....

आपका बच्चा आपका पगला अक्षय,,,,