Wednesday, October 20, 2010

दुल्हनिया...!

ना,ना,न छूना घूंघटा,
सहमी सिमटी है दुल्हनिया,
अभी छलके हैं इस के नैना,
यादों में है बाबुल अपना!

आँखों से कजरा बह गया,
बालों में गजरा मुरझाया,
हैं हिनाभरी हथेलियाँ,
याद आ रही हैं सहेलियाँ...

दादी औ माँ में उलझा है ज़ेहन,
उसमे बसा है नैहरका आँगन,
धूप में बरसती सावनी फुहार,
फूल बरसाता हारसिंगार...

गीली मिट्टी पे मोलश्री के फूल,
नीम के तिनकों में पिरोये हार,
मेलों के तोहफे,बहनका दुलार,
अभी यही है,इसका सिंगार!

20 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत सुन्दर.....

M VERMA said...

हैं हिनाभरी हथेलियाँ,
याद आ रही हैं सहेलियाँ...

नवेली दुल्हन के मनोभावों को बारीकी से रेखांकित किया है.

वन्दना said...

गज़ब का चित्रण किया है।
आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (22/10/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com

वाणी गीत said...

नयी नवेली दुल्हन का चित्र आँखों के सामने घूम गया ...!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

sundar , bhaavpurn rachna

संतोष कुमार said...

बहुत ही सुंदर कविता !

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

बहुत खूबसूरती से पेश किए हैं दुल्हन के मनोभाव.

Asha said...

बहुत नजाकत से दुल्हन को कविता में उकेरा है|
बधाई
आशा

Dorothy said...

खूबसूरत अहसासों को पिरोती हुई एक सुंदर भावप्रवण रचना. आभार.
सादर
डोरोथी.

Aashu said...

"दादी औ माँ में उलझा है ज़ेहन,
उसमे बसा है नैहरका आँगन,"

बहुत खूबसूरत!

http://draashu.blogspot.com/2010/10/blog-post_24.html

ktheLeo said...

शमा जी,
वाह, बेहतरीन चित्रण!

Dr.R.Ramkumar said...

गीली मिट्टी पे मोलश्री के फूल,
नीम के तिनकों में पिरोये हार,
मेलों के तोहफे,बहनका दुलार,
अभी यही है,इसका सिंगार!


bahut sunder bimb..

mridula pradhan said...

bahut achchi lagi.

VIJAY KUMAR VERMA said...

ना,ना,न छूना घूंघटा,
सहमी सिमटी है दुल्हनिया,
अभी छलके हैं इस के नैना,
यादों में है बाबुल अपना!
bahut hee bhawuk rachna...badhayi..

psingh said...

bahut khub
dipawali ki shubhkamnayen

amar jeet said...

बदलते परिवेश मैं,
निरंतर ख़त्म होते नैतिक मूल्यों के बीच,
कोई तो है जो हमें जीवित रखे है,
जूझने के लिए प्रेरित किये है ,
उसी प्रकाश पुंज की जीवन ज्योति,
हमारे ह्रदय मे सदैव दैदीप्यमान होती रहे,
यही शुभकामनाये!!
दीप उत्सव की बधाई .............

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

बहुत सुन्दर रचना है !
आपको और आपके परिवार को एक सुन्दर, शांतिमय और सुरक्षित दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें !

Dorothy said...

इस ज्योति पर्व का उजास
जगमगाता रहे आप में जीवन भर
दीपमालिका की अनगिन पांती
आलोकित करे पथ आपका पल पल
मंगलमय कल्याणकारी हो आगामी वर्ष
सुख समृद्धि शांति उल्लास की
आशीष वृष्टि करे आप पर, आपके प्रियजनों पर

आपको सपरिवार दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं.
सादर
डोरोथी.

Manas Khatri said...

बहुत ही सुन्दर रचना..शुभकामनाएं..!!

mark rai said...

very nice post..