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Wednesday, July 20, 2011

बता तो सही कौन है तू?


घुमड रहा है,
गुबार बन के कहीं,
अगर तू सच है तो,
ज़ुबाँ पे आता क्यों नही?

सच अगर है तो,
तो खुद को साबित कर,
झूंठ है तो,
बिखर जाता क्यों नहीं?

आईना है,तो,
मेरी शक्ल दिखा,
तसवीर है तो,
मुस्कुराता क्यों नहीं?

मेरा दिल है,
तो मेरी धडकन बन,
अश्क है,
तो बह जाता क्यों नहीं?

ख्याल है तो  कोई राग बन,
दर्द है तो फ़िर रुलाता,
क्यों नही?

बन्दा है तो,
कोई उम्मीद मत कर,
खुदा है तो,
नज़र आता क्यों नहीं?


बात तेरे और मेरे बीच की है,
चुप क्यों बैठा है?
बताता क्यों नहीं? 


Monday, February 28, 2011

दुआ बहार की! "कविता" पर भी!




क्या कह दूँ के तुम्हें करार आ जाये,
मेरी बातों पे तुम्हें ऎतबार आ जाये॥

दिल इस दुनिया से क्यूँ नहीं भरता,
उनकी बेरूखी पे भी प्यार आ जाये।

दर्द इतने मैं कहाँ छुपाऊँ भला,
मौत से कहो एक बार आ जाये।

वीरानियाँ भी तो तेरा हिस्सा हैं,
या खुदा इधर भी बहार आ जाये।

Saturday, July 3, 2010

गुलों से बात! अभी सिर्फ़ "कविता" पर!

"सच में" www.sachmein.blogspot.com


अज़ीब शक्स है वो गुलो से बात करता है,
अपनी ज़ुरूफ़ से भरे दिन को रात करता है.

वो जो कहता है भोली प्यार की बातें,
खामोश हो के खुदा भी समात करता है,

मां बन के कभी उसके प्यार का जादू
एक जर्रे: को भी  काइनात करता है,

मेरे प्यार को वो भला कैसे जानेगा?
जब देखो मूंह बनाके बात करता है! 

Friday, January 8, 2010

बेवफ़ाई का सच!



कल मुझे इक खबर ने दुखी कर दिया!


मेरे  दोस्त का तलाक हो गया!


आम बात(खबर) है ये आज कल,


पर मेरे दुखी होने की वजह और थी,


दोनों ’तलाक शुदा’ व्यक्ति मेरे दोस्त रहे थे!


एक (उनकी) शादी से पहले और एक शादी के बाद! 




हांलाकि मैं तलाक की वजह नहीं था!




पर अफ़सोस कि बात ये के


काश उन दोनों मे से ,


कोई एक तो ऐसा होता,




जो मोहब्बत की कद्र कभी तो समझता!
शादी से पहले या शादी के बाद !

Tuesday, July 7, 2009

क्यों इल्ज़ामे बेवफाई ?

अपनी उम्मीदें दफनाई
नींव तुम्हारे घरकी बनायी......

अपने लिए सपने कोई ,
कभी देखे नहीं ....

गर पलक झपकी भी,
पलकों ने झालर बुनी

ख्वाब आँखों के थे तुम्हारी......
मेरी तमन्ना कहाँ थी ?

गर पूरी नही हुई,
उसमे मेरी खता कहाँ थी?

क्यों इल्ज़ामे बेवफाई?
जब हर वफ़ा निभायी!...

मैं तो नींद गहरी ,
सोयी कभी? कभी नही!

दूर रहे हर आँधी,
ऐसी की निगेहबानी!