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Wednesday, July 20, 2011

बता तो सही कौन है तू?


घुमड रहा है,
गुबार बन के कहीं,
अगर तू सच है तो,
ज़ुबाँ पे आता क्यों नही?

सच अगर है तो,
तो खुद को साबित कर,
झूंठ है तो,
बिखर जाता क्यों नहीं?

आईना है,तो,
मेरी शक्ल दिखा,
तसवीर है तो,
मुस्कुराता क्यों नहीं?

मेरा दिल है,
तो मेरी धडकन बन,
अश्क है,
तो बह जाता क्यों नहीं?

ख्याल है तो  कोई राग बन,
दर्द है तो फ़िर रुलाता,
क्यों नही?

बन्दा है तो,
कोई उम्मीद मत कर,
खुदा है तो,
नज़र आता क्यों नहीं?


बात तेरे और मेरे बीच की है,
चुप क्यों बैठा है?
बताता क्यों नहीं? 


Wednesday, May 5, 2010

प्लीज़!

'प्लीज़' "कविता" पर भी! क्यों नहीं! 

इस बार ऐसा करना,

जब बिना बताये आओ,

किसी दिन

तो 
चुपचाप
चुरा कर ले जाना,

जो कुछ भी,
तुम्हें लगे,
कीमती,

मेरे घर,
जेहन,
या शख्शियत में,

प्लीज़!

गर ये भी न हो पाया,

तो ,
मैं,

टूट जाउंगा,

क्यों कि सुना है,

मुफ़लिसी 

इन्सान को

खोखला कर देती है!

Saturday, March 27, 2010

आओ गीत लिखें!

एक पुरानी रचना "कविता" के प्रबुद्ध पाठकों की नज़र कर रहा हूं!

आओ गीत लिखें,
हारें क्यों हम गम से डर से,
प्यार की जीत लिखें,
आओ गीत.....
जहाँ धुन्न्ध है अंधियारा है ,
बारूदो का गलियारा है,
जीवन संगीत लिखें,
आओ गीत....
आतंकी चेहरों को भूलें,
दर्द मिटा दें मरहम से,
प्यारे मनमीत लिखें,
आओ गीत....

क्यों नफ़रत के शूल उगायें ,
क्यों ना मिल कर फूल खिलायें
उपवन में प्रीत लिखें,
आओ गीत ......
गीत लिखें कुछ खट्टे मीठे,
गीत लिखें कुछ सच्चे झूंठे,
जीवन की रीत लिखें,
आओ गीत.....
गीत लिखें कुछ रंगबिरंगे,
गीत लिखे कुछ नंगधड़न्गे
बचपन की भीत रखें,
आओ गीत लिखें......
आओ गीत लिखें............!!!!!!

Friday, March 12, 2010

ख्वाहिश! (कविता पर भी) मेरा पैगाम है मोहब्ब्त जहां तक पहुंचे!

तेरे मेरे 
शाम सवेरे,
कभी उजाले
कभी अंधेरे.

मन मेरा,
ज्यूं ढलता सूरज
गहरे बादल,
गेसू तेरे,

मैं एकाकी
तू भी तन्हा
यादों में आ
साथी मेरे

खुली आंख से
सपना जैसा,
तेरी आंख में
आंसू मेरे,

दुनियां ज़ालिम,
सूखे उपवन
दूर बसायें
अपने डेरे,

क्या जादू है?
मै न जानूं!
नींदें मेरी,
सपने तेरे|