Showing posts with label ख्वाब सच्चाई.. Show all posts
Showing posts with label ख्वाब सच्चाई.. Show all posts

Wednesday, July 20, 2011

बता तो सही कौन है तू?


घुमड रहा है,
गुबार बन के कहीं,
अगर तू सच है तो,
ज़ुबाँ पे आता क्यों नही?

सच अगर है तो,
तो खुद को साबित कर,
झूंठ है तो,
बिखर जाता क्यों नहीं?

आईना है,तो,
मेरी शक्ल दिखा,
तसवीर है तो,
मुस्कुराता क्यों नहीं?

मेरा दिल है,
तो मेरी धडकन बन,
अश्क है,
तो बह जाता क्यों नहीं?

ख्याल है तो  कोई राग बन,
दर्द है तो फ़िर रुलाता,
क्यों नही?

बन्दा है तो,
कोई उम्मीद मत कर,
खुदा है तो,
नज़र आता क्यों नहीं?


बात तेरे और मेरे बीच की है,
चुप क्यों बैठा है?
बताता क्यों नहीं? 


Saturday, March 27, 2010

आओ गीत लिखें!

एक पुरानी रचना "कविता" के प्रबुद्ध पाठकों की नज़र कर रहा हूं!

आओ गीत लिखें,
हारें क्यों हम गम से डर से,
प्यार की जीत लिखें,
आओ गीत.....
जहाँ धुन्न्ध है अंधियारा है ,
बारूदो का गलियारा है,
जीवन संगीत लिखें,
आओ गीत....
आतंकी चेहरों को भूलें,
दर्द मिटा दें मरहम से,
प्यारे मनमीत लिखें,
आओ गीत....

क्यों नफ़रत के शूल उगायें ,
क्यों ना मिल कर फूल खिलायें
उपवन में प्रीत लिखें,
आओ गीत ......
गीत लिखें कुछ खट्टे मीठे,
गीत लिखें कुछ सच्चे झूंठे,
जीवन की रीत लिखें,
आओ गीत.....
गीत लिखें कुछ रंगबिरंगे,
गीत लिखे कुछ नंगधड़न्गे
बचपन की भीत रखें,
आओ गीत लिखें......
आओ गीत लिखें............!!!!!!

Thursday, November 12, 2009

सच बे उन्वान!

पलकें  नम थी मेरी,  
घास पे शबनम की तरह,
तब्बसुम लब पे सजा था,
किसी मरियम की तरह.

वो मुझे छोड गया ,
संगे राह समझ. 
मै उसके साथ चला था,
हरदम, हमकदम की तरह.

वफ़ा मेरी कभी 
रास न आई उसको,
वो ज़ुल्म करता रहा, 
मुझ पे बेरहम की तरह.

फ़रिस्ता मुझको समझ के ,
वो आज़माता रहा,
मैं तो कमज़ोर सा इंसान 
था आदम की तरह.

ख्वाब जो देके गया ,
वो बहुत हंसी है मगर,
तमाम उम्र कटी मेरी 
शबे गम की तरह.


Saturday, April 25, 2009

सच्चाई जान लेने दो....

गर्दूं-गाफिल ने कहा…

चाहना हक नहीं उल्फत ,मुहब्बत तो है मिट जाना
बाँटना मुस्कुराहट ही ,फकत चाहत का पैमाना

जमाने के लिए रोता , जमाने लिए हंसता
मजहब जिसका मुहब्बत है जमाने के लिए मरता
उम्मीदें जिसने पालीं हैं ,वही गमगीन होता है
जिसे तुम आजमाओगे, वही टूटेगा पैमाना

खोल लो दिल के दरवाजे ,हवाओं को गुजरने दो
अंदेशे तो सदा होंगे ,उन्हें भी वार करने दो
सच्चाई जान लेने दो , गुरुर ऐ बद गुमानी को,
वो चाहत ख्वाब है याफ़िर दिलेवहशत का अफसाना

गर्दूं -गाफिल जिकी ये रचना ख़ुद उन्होंने पेश की थी, मेरे कविता ब्लॉग पे( टिप्पणीके साथ) ...मुझे ये रचना अप्रतीम लगी...और अपने ब्लॉग पे डाल दी...उनके ब्लॉग पेभी है..मुझे लगा कि , गर पाठक यहाँ भी पढ़ें,तो और ज़्यादा पढी जायेगी...टिप्पणी तो खो जायेगी...