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Tuesday, July 7, 2009

क्यों इल्ज़ामे बेवफाई ?

अपनी उम्मीदें दफनाई
नींव तुम्हारे घरकी बनायी......

अपने लिए सपने कोई ,
कभी देखे नहीं ....

गर पलक झपकी भी,
पलकों ने झालर बुनी

ख्वाब आँखों के थे तुम्हारी......
मेरी तमन्ना कहाँ थी ?

गर पूरी नही हुई,
उसमे मेरी खता कहाँ थी?

क्यों इल्ज़ामे बेवफाई?
जब हर वफ़ा निभायी!...

मैं तो नींद गहरी ,
सोयी कभी? कभी नही!

दूर रहे हर आँधी,
ऐसी की निगेहबानी!