सुना था मेरे बड़ों से,
चिड़िया खेत चुग जाये,
फ़ायदा नही रोनेसे!
ये कहावत चली आयी
गुज़रती हुई सदियों से,
ना भाषाका भेद
ना किसी देशकाही
खेत बोए गए,
पँछी चुगते गए,
लोग रोते रहे
इतिहास गवाह है
सिलसिला थमा नही
चलताही रहा
चलताही रहा !
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Friday, January 8, 2010
Monday, August 3, 2009
चिड़िया ग़र चुग जाये खेत....
सुना था मेरे बड़ों से,
चिड़िया खेत चुग जाये,
फ़ायदा नही रोनेसे!
ये कहावत चली आयी
गुज़रती हुई सदियों से,
ना भाषाका भेद
ना किसी देशकाही
खेत बोए गए,
पँछी चुगते गए,
लोग रोते रहे
इतिहास गवाह है
सिलसिला थमा नही
चलताही रहा
चलताही रहा !
चिड़िया खेत चुग जाये,
फ़ायदा नही रोनेसे!
ये कहावत चली आयी
गुज़रती हुई सदियों से,
ना भाषाका भेद
ना किसी देशकाही
खेत बोए गए,
पँछी चुगते गए,
लोग रोते रहे
इतिहास गवाह है
सिलसिला थमा नही
चलताही रहा
चलताही रहा !
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