Showing posts with label बूँद.. Show all posts
Showing posts with label बूँद.. Show all posts

Saturday, April 4, 2009

भटकी हुई बदरी....

हूँ भटकती हुई एक बदरी,
अपनेही बंद आसमानोंकी,
जिसे बरसनेकी इजाज़त नही....

वैसेतो मुझमे, नीरभी नही,
बिजुरीभी नही,युगोंसे हूँ सूखी,
पीछे छुपा कोई चांदभी नही....

चाहत एक बूँद नूरकी,
आदी हूँ अन्धेरोंकी,फिरभी,
सदियोंसे वो मिली नही....

के मै हूँ भटकी हुई एक बदरी,
अपनेही बंद आसमानोंकी....
मेरे लिए तमन्नाएँ लाज़िम नही....

शमा।