उफ़्फ़क पे जाके शायद, मिल जाते,
मैं अगर आसमां, और तू ज़मी होता
इस दुनियां में सब मुसाफ़िर हैं,
कोई मुस्तकिल मकीं नही होता.
सौ बार आईना देख आया,
फ़िर भी क्यूं खुद पर यकीं नही होता.
दिल के टुकडे बहुत हुये होगें,
यूं ही कोई गमनशीं नहीं होता!
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