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Sunday, November 6, 2011

उम्र का सच




उम्र की नाप का पैमाना क्या है?

साल,

माथे  या गालों की झुर्रियां,

सफ़ेद बालों की झलक,

मैं मानता नहीं,

उम्रदराज़ होने के लिये,
न तो सालों लम्बे सफ़र की ज़रूरत है,
और न अपने चेहरे पे वख्त की लकीरें उकेरने की,

उम्र तो वो मौसम है ज़िन्दगी का,
जो दबे पांव चला आता है,
अचानक कभी भी,
और सिखा जाता है,
सारे दांव पेंच ,दुनियादारी के,

आप मानते नहीं ,

चलो जाने दो,
अगली बार जब ट्रैफ़िक लाइट पर रुको,
तो कार के शीशे से बाहर देखना,  

छै से दस साल की  कई कम उम्र लडकियां ,
अपनी गोद में खुद से जरा ही कम बच्चे को लिये,
दिख जायेंगी,

उम्र नापने के सारे पैमाने,
तोड देने का दिल करेगा मेरे दोस्त!

और  तब,

एक बार, 

सिर्फ़ एक बार,

उन सब ’हेयर कलर’ और ’स्किन क्रीम’ के
नाम याद करने  की कोशिश करना,
जो उम्र के निशान मिटा देने का दावा करते है,


उन में से एक भी,
उम्र के,
इन निशानों को नहीं मिटा सकतीं!


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Monday, September 20, 2010

हर मन की"अनकही"!By 'Ktheleo'

मैं फ़ंस के रह गया हूं!
अपने
जिस्म,
ज़मीर,
ज़ेहन,
और
आत्मा 
की जिद्दोजहद में,

जिस्म की ज़रूरतें,
बिना ज़ेहन के इस्तेमाल,
और ज़मीर के कत्ल के,
पूरी होतीं नज़र नहीं आती!

ज़ेहन के इस्तेमाल,
का नतीज़ा,
अक्सर आत्मा पर बोझ 
का कारण बनता लगता है!

और ज़मीर है कि,
किसी बाजारू चीज!, की तरह,
हर दम बिकने को तैयार! 

पर इस कशमकश ने,
कम से कम 
मुझे,
एक तोहफ़ा तो दिया ही है!

एक पूरे मुकम्मल "इंसान"की तलाश का सुख!

मैं जानता हूं,
एक दिन,
खुद को ज़ुरूर ढूंड ही लूगां!

वैसे ही!
जैसे उस दिन,
बाबा मुझे घर ले आये थे,
जब मैं गुम गया था मेले में! 


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