क्या ख़ूब नज़ारे थे !
चश्मदीद गवाह बन गए,
अपनी ही मौत के,मारे गए,
बेमौत,वो कितने खुश हुए,
अर्थी में काँधे न लगे,
हम ज़िंदा लाश थे !
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Saturday, November 7, 2009
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