१) मीलों फासले..
मीलों तय किए फासले
दिन में पैरों ने हमारे,
शाम हुई तो देखा,
हम वहीँ खड़े थे,
वो मील का पत्थर,
सना हुआ धूलसे,
छुपा था चन्द झाडियों में,
जहाँसे भोर भये,
हम चल पड़े थे,
हम क्यों थक गए?
क्या हुआ जो,
क़दम रुक गए?
२) खुशी या दर्द?
गर मै हूँ खुशी किसीकी,
मत छीनना मुझे कि,
छीन के मिल सकती नही...
हूँ मै दर्द तुम्हारा,
मत लौटाना मुझे,कि,
मै लौट सकती नही ...
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Monday, January 11, 2010
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