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Tuesday, March 30, 2010

बयाने दास्ताँ !

दर्द कहाँ,कब बाँटा किसीने?
किसने दामन से काँटे चुने?
किसे फ़ुरसत के,रुक जाये,
दो लम्हें,एक दास्ताँ सुन जाये?
अभी बयानी शुरू हुई नही,
देखो! वो उठे और चल दिए!